*कितनी पावन होगी यह ईंट.?*
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आज सुबह की बात है.
मैं अपने *कर्मठ और सेवाधारी* कार्यकर्ताओं /शिष्यों के साथ यज्ञशाला - जहाँ कल शाम तक *51 कुंडी पीताम्बरा बगलामुखी महायज्ञ* हुआ था, सफाई और व्यवस्था के लिए उपस्थित था.
यज्ञकुंड जो मिट्टी और ईंट से बना था, विसर्जित कर के सफाई का काम देख रहा था.
ऐक सज्जन ने आकर, बहुत विनम्रता से विनती की,.. आपकी अनुमति हो तो दो ईंट में लेना चाहता हूं.
मैंने कहा जरूर लेजाओ,
मगर यह बताओ कि लेकर आप उसका क्या करेंगे.?
उसने बताया कि मैं अपने घर में छतके उपर रखना चाहता हूं, जिससे मेरे ऊपर *मां* की कृपा बरसती रहे....
ऐसे एक के बाद एक... तीन - चार लोग आये, जिसको यज्ञकुंड की *पावन ईंट* की जरूरत थी. ऐसे लोग भी मिले, जिसने ईंट के बदले पैसे देने की या किसी और ने ईंट के बदले में सफाई कार्य में सेवा करने की ओफर की...
हमारे बहुत से लोगों उस समय मौजूद थे...
*अभी रात्रि में बारह बजकर 42 मिनट हुई है*...
विचार आता है कि....
51 कुंडी महायज्ञ की ईंट का इतना प्रभाव है तो यज्ञमें उपस्थित रहकर *आहूति* देने वाले का कितना कल्याण होगा...?
..... और अपना काम छोड़ कर मां के काम में लगे कार्यकर्ताओं को कितना फल मिलेगा...?
। जय मां पीताम्बरा बगलामुखी ।
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✋🏼 *गुरुजी*
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